साल 2016 में डॉ. जाकिर नाइक के इस्लामी रिसर्च फाउंडेशन पर विभिन्न धार्मिक समुदायों और भड़काऊ भाषण देने का इल्ज़ाम लगे थे, समूहों के बीच दुश्मनी,अन्य नकारात्मक सोच को फैलाने और समूह के सदस्योंको होंसला और मदद करने के कई आरोप लगे थे।

20 नवंबर को क़तर में फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप की शुरुआत हुई है। इस बीच ख़बर आई है कि क़तर ने जाकिर नाइक को अपने यहां बुलाया है इस बीच सोशल मीडिया पर #BoyycottQatar2022 ट्रेंड किया जारा है। फीफा वर्ल्ड कप में भगोड़ा जाकिर नाइक को बुलाएं जाने का विरोध भाजपा ने किया है। भारत के केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इस मामले पर नाराज़ हो कर कहा है कि भारत इस मुद्दे को जरूर उठाएगा। उन्होंने आगे कहा है कि जाकिर नाइक मलेशियन नागरिक है आप उसे कहीं भी बुलाइए लेकिन उस मंच पर मत बुलाइए।

जाकिर नाइक पर क्यों भड़का है भारत ?

आप को बता दें कि फीफा विश्व कप 2022 में जाकिर नाइक को इनवाइट किया गया है। भारत देश में जाकिर को विवादित बयान देने से जाकिर नाइक पर रोक लगा दिया गया था। और फिर उसके खिलाफ गिरफ्तारी का वारंट भी जारी हुआ था। फिर जाकिर नाइक भारत से फरार हो गया, हालांकि, जाकिर कई साल से भारत देश से बाहर है। अब जाकिर नाइक को फिफा विश्व कप में बुलाया गया है। वर्ल्ड कप के दौरान वह धार्मिक भाषण देंगे। नाइक पर भारत देश में मनी लॉन्ड्रिंग और अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने का आरोप है।

FIFA World Cup 2022

डॉ. जाकिर नाइक पर क्या है आरोप

साल 2016 में डॉ. जाकिर नाइक के इस्लामी रिसर्च फाउंडेशन पर विभिन्न धार्मिक समुदायों और भड़काऊ भाषण देने का इल्ज़ाम लगे थे, समूहों के बीच दुश्मनी,अन्य नकारात्मक सोच को फैलाने और समूह के सदस्योंको होंसला और मदद करने के कई आरोप लगे थे। इसके बाद भारत में इस तबके को गैरकानूनी घोषित कर दिया गया। फिर उसके बाद जाकिर नाइक ने भारत छोड़ मलेशिया बस गए। वह फिलहाल मलेशिया में ही रहे ।

भारत और क़तर अब दोस्त या बागी

भारत-कतर के ताल्लुक़ात क़तर के बीच गहरा संबंध है। भारत दोहा में एक अपना दूतावास रखता है। दुसरी तरफ क़तर नई दिल्ली में एक दूतावास रखता है। क़तर के अमीर हमद बिन खलीफा अल थानी ने अप्रैल 1999, मई 2005 और अप्रैल 2012 में भारत की राजनीतिक दौरा किया है। 2016 में 4 जून को भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी दो दिन की दोहा यात्रा में पहुंचे, भारत और क़तर में आर्थिक संबंधों को विशेष रूप से हाइड्रोकार्बन संबंधित चर्चा हुई थी। उस यात्रा के दौरान क़तर में रहने वाले भारतीय कामगारों के भोजन भी किया और एक कार्यक्रम में अप्रवासी भारतीयों को संबोधित किया।